वाल्मीकि रामायण 2.54.22
अवकाशो विविक्तः अयम् महा नद्योह् समागमे ।पुण्यः च रमणीयः च वसतु इह भगान् सुखम्॥
avakāśo viviktaḥ ayam mahā nadyoh samāgame |puṇyaḥ ca ramaṇīyaḥ ca vasatu iha bhagān sukham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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