वाल्मीकि रामायण 2.54.23
एवम् उक्तः तु वचनम् भरद्वाजेन राघवः ।प्रत्युवाच शुभम् वाक्यम् रामः सर्व हिते रतः॥
evam uktaḥ tu vacanam bharadvājena rāghavaḥ |pratyuvāca śubham vākyam rāmaḥ sarva hite rataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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