वाल्मीकि रामायण 2.54.24
भगवन्न् इताअसन्नः पौर जानपदो जनः ।सुदर्शमिह माम् प्रेक्ष्य मन्येऽह मिममाश्रमम्॥
bhagavann itāasannaḥ paura jānapado janaḥ |sudarśamiha mām prekṣya manye'ha mimamāśramam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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