वाल्मीकि रामायण 2.54.33
स रामम् सर्व कामैअः तम् भरद्वाजः प्रिय अतिथिम् ।सभार्यम् सह च भ्रात्रा प्रतिजग्राह धर्मवित्॥
sa rāmam sarva kāmaiaḥ tam bharadvājaḥ priya atithim |sabhāryam saha ca bhrātrā pratijagrāha dharmavit ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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