वाल्मीकि रामायण 2.54.4
यथा क्षेमेण गच्चन् स पश्यमः च विविधान् द्रुमान् ।निवृत्त मात्रे दिवसे रामः सौमित्रिम् अब्रवीत्॥
yathā kṣemeṇa gaccan sa paśyamaḥ ca vividhān drumān |nivṛtta mātre divase rāmaḥ saumitrim abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें