वाल्मीकि रामायण 2.54.6
नूनम् प्राप्ताः स्म सम्भेदम् गन्गा यमुनयोः वयम् ।तथा हि श्रूयते शम्ब्दो वारिणा वारि घट्टितः॥
nūnam prāptāḥ sma sambhedam gangā yamunayoḥ vayam |tathā hi śrūyate śambdo vāriṇā vāri ghaṭṭitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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