वाल्मीकि रामायण 2.54.9
रामः तु आश्रमम् आसाद्य त्रासयन् मृग पक्षिणः ।गत्वा मुहूर्तम् अध्वानम् भरद्वाजम् उपागमत्॥
rāmaḥ tu āśramam āsādya trāsayan mṛga pakṣiṇaḥ |gatvā muhūrtam adhvānam bharadvājam upāgamat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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