वाल्मीकि रामायण 2.55.6
तत्र यूयम् प्लवम् कृत्वा तरताम्शुमतीम् नदीम् ।ततो न्यग्रोधमासाद्य महान्तम् हरितच्छदम्॥
tatra yūyam plavam kṛtvā taratāmśumatīm nadīm |tato nyagrodhamāsādya mahāntam haritacchadam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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