वाल्मीकि रामायण 2.57.18
हर्म्यैर्विमानैः प्रासादैरवेक्ष्याथ समागतम् ।हाहाकारकृता नार्यो रामदर्शनकर्शिताः॥
harmyairvimānaiḥ prāsādairavekṣyātha samāgatam |hāhākārakṛtā nāryo rāmadarśanakarśitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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