वाल्मीकि रामायण 2.58.5
क्व नु वत्स्यति धर्म आत्मा वृक्ष मूलम् उपाश्रितः ।सो अत्यन्त सुखितः सूत किम् अशिष्यति राघवः॥
kva nu vatsyati dharma ātmā vṛkṣa mūlam upāśritaḥ |so atyanta sukhitaḥ sūta kim aśiṣyati rāghavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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