वाल्मीकि रामायण 2.59.33
अशोभनम् यो अहम् इह अद्य राघवम् ।दिदृक्षमाणो न लभे सलक्ष्मणम्इति इव राजा विलपन् महा यहाशःपपात तूर्णम् शयने स मूर्चितः॥
aśobhanam yo aham iha adya rāghavam |didṛkṣamāṇo na labhe salakṣmaṇamiti iva rājā vilapan mahā yahāśaḥpapāta tūrṇam śayane sa mūrcitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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