वाल्मीकि रामायण 2.63.24
अन्यम् चापि मृगम् हिम्स्रम् शब्दम् श्रुत्वाभु पागतम् ।अथ अन्ध कारे तु अश्रौषम् जले कुम्भस्य पर्यतः॥
anyam cāpi mṛgam himsram śabdam śrutvābhu pāgatam |atha andha kāre tu aśrauṣam jale kumbhasya paryataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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