वाल्मीकि रामायण 2.63.7
गुरु लाघवम् अर्थानाम् आरम्भे कर्मणाम् फलम् ।दोषम् वा यो न जानाति स बालैति ह उच्यते॥
guru lāghavam arthānām ārambhe karmaṇām phalam |doṣam vā yo na jānāti sa bālaiti ha ucyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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