वाल्मीकि रामायण 2.64.23
यद्य् एतत् अशुभम् कर्म न स्म मे कथयेः स्वयम् ।फलेन् मूर्धा स्म ते राजन् सद्यः शत सहस्रधा॥
yady etat aśubham karma na sma me kathayeḥ svayam |phalen mūrdhā sma te rājan sadyaḥ śata sahasradhā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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