वाल्मीकि रामायण 2.64.39
ततः वैवस्वतम् दृष्ट्वा तम् प्रवक्ष्यामि भारतीम् ।क्षमताम् धर्म राजो मे बिभृयात् पितराव् अयम्॥
tataḥ vaivasvatam dṛṣṭvā tam pravakṣyāmi bhāratīm |kṣamatām dharma rājo me bibhṛyāt pitarāv ayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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