वाल्मीकि रामायण 2.64.4
तत्र अहम् दुर्बलाव् अन्धौ वृद्धाव् अपरिणायकौ ।अपश्यम् तस्य पितरौ लून पक्षाव् इव द्विजौ॥
tatra aham durbalāv andhau vṛddhāv apariṇāyakau |apaśyam tasya pitarau lūna pakṣāv iva dvijau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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