वाल्मीकि रामायण 2.64.54
त्वया तु यद् अविज्ञानान् निहतः मे सुतः शुचिः ।तेन त्वाम् अभिशप्स्यामि सुदुह्खम् अतिदारुणम्॥
tvayā tu yad avijñānān nihataḥ me sutaḥ śuciḥ |tena tvām abhiśapsyāmi suduhkham atidāruṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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