वाल्मीकि रामायण 2.64.70
पद्म पत्र ईक्षणम् सुभ्रु सुदम्ष्ट्रम् चारु नासिकम् ।धन्या द्रक्ष्यन्ति रामस्य तारा अधिप निभम् मुखम्॥
padma patra īkṣaṇam subhru sudamṣṭram cāru nāsikam |dhanyā drakṣyanti rāmasya tārā adhipa nibham mukham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें