वाल्मीकि रामायण 2.7.4
माल्यमोदकहस्तैश्च द्विजेन्द्रैरभिनादिताम् ।शुक्लदेवगृहद्वारां सर्ववादित्रनिस्वनाम्॥
mālyamodakahastaiśca dvijendrairabhināditām |śukladevagṛhadvārāṃ sarvavāditranisvanām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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