वाल्मीकि रामायण 2.72.16
तत् श्रुत्वा भरतः वाक्यम् धर्म अभिजनवान् शुचिः ।पपात सहसा भूमौ पितृ शोक बल अर्दितः॥
tat śrutvā bharataḥ vākyam dharma abhijanavān śuciḥ |papāta sahasā bhūmau pitṛ śoka bala arditaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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