वाल्मीकि रामायण 2.72.23
मत्तमातङ्गसम्काशम् चन्द्रार्कसदृशम् भुवः ।उत्थापयित्वा शोक आर्तम् वचनम् च इदम् अब्रवीत्॥
mattamātaṅgasamkāśam candrārkasadṛśam bhuvaḥ |utthāpayitvā śoka ārtam vacanam ca idam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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