वाल्मीकि रामायण 2.72.39
तत् श्रुत्वा विषसाद एव द्वितीया प्रिय शम्सनात् ।विषण्ण वदनो भूत्वा भूयः पप्रच्च मातरम्॥
tat śrutvā viṣasāda eva dvitīyā priya śamsanāt |viṣaṇṇa vadano bhūtvā bhūyaḥ papracca mātaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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