वाल्मीकि रामायण 2.73.14
अहम् हि पुरुष व्याघ्राव् अपश्यन् राम लक्ष्मणौ ।केन शक्ति प्रभावेन राज्यम् रक्षितुम् उत्सहे॥
aham hi puruṣa vyāghrāv apaśyan rāma lakṣmaṇau |kena śakti prabhāvena rājyam rakṣitum utsahe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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