वाल्मीकि रामायण 2.73.21
न हि मन्ये नृशसे त्वम् राजधर्ममवेक्षसे ।गतिम् वा न विजानासि राजवृत्तस्य शाश्वतीम्॥
na hi manye nṛśase tvam rājadharmamavekṣase |gatim vā na vijānāsi rājavṛttasya śāśvatīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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