वाल्मीकि रामायण 2.73.23
तेषाम् धर्मैकरक्षाणाम् कुलचारित्रयोगिनाम् ।अत्र चारित्रशौण्डीर्यम् त्वाम् प्राप्य विनिवर्ततम्॥
teṣām dharmaikarakṣāṇām kulacāritrayoginām |atra cāritraśauṇḍīryam tvām prāpya vinivartatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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