वाल्मीकि रामायण 2.73.3
दुह्खे मे दुह्खम् अकरोर् व्रणे क्षारम् इव आदधाः ।राजानम् प्रेत भावस्थम् कृत्वा रामम् च तापसम्॥
duhkhe me duhkham akaror vraṇe kṣāram iva ādadhāḥ |rājānam preta bhāvastham kṛtvā rāmam ca tāpasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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