वाल्मीकि रामायण 2.75.60
तथा तु शपथैः कष्टैः शपमानम् अचेतनम् ।भरतम् शोक सम्तप्तम् कौसल्या वाक्यम् अब्रवीत्॥
tathā tu śapathaiḥ kaṣṭaiḥ śapamānam acetanam |bharatam śoka samtaptam kausalyā vākyam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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