वाल्मीकि रामायण 2.76.22
ततः रुदन्त्यो विवशा विलप्य च पुनः पुनः ।यानेभ्यः सरयू तीरम् अवतेरुर् वर अन्गनाः॥
tataḥ rudantyo vivaśā vilapya ca punaḥ punaḥ |yānebhyaḥ sarayū tīram avaterur vara anganāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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