वाल्मीकि रामायण 2.76.9
विधवा पृथिवी राजम्स् त्वया हीना न राजते ।हीन चन्द्रा इव रजनी नगरी प्रतिभाति माम्॥
vidhavā pṛthivī rājams tvayā hīnā na rājate |hīna candrā iva rajanī nagarī pratibhāti mām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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