वाल्मीकि रामायण 2.8.13
तां दृष्ट्वा परमप्रीतां ब्रुवन्तीं मन्थरां ततः ।रामस्यैव गुणान् देवी कैकेयि प्रशशंस ह॥
tāṃ dṛṣṭvā paramaprītāṃ bruvantīṃ mantharāṃ tataḥ |rāmasyaiva guṇān devī kaikeyi praśaśaṃsa ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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