वाल्मीकि रामायण 2.8.32
तस्मान्न लक्ष्मणे रामः पापं किञ्चित्करिष्यति ।रामस्तु भरते पापं कुर्यादिति न सं शयः॥
tasmānna lakṣmaṇe rāmaḥ pāpaṃ kiñcitkariṣyati |rāmastu bharate pāpaṃ kuryāditi na saṃ śayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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