वाल्मीकि रामायण 2.8.34
एवं ते ज्ञातिपक्षस्य श्रेयश्चैव भविष्यति ।यदि चेद्भरतो धर्मात्पित्र्यं राज्यमवाप्स्यति॥
evaṃ te jñātipakṣasya śreyaścaiva bhaviṣyati |yadi cedbharato dharmātpitryaṃ rājyamavāpsyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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