वाल्मीकि रामायण 2.80.20
विसर्पत्भिर् इव आकाशे विटन्क अग्र विमानकैः ।समुच्च्रितैः निवेशाः ते बभुः शक्र पुर उपमाः॥
visarpatbhir iva ākāśe viṭanka agra vimānakaiḥ |samuccritaiḥ niveśāḥ te babhuḥ śakra pura upamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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