वाल्मीकि रामायण 2.82.24
ताः प्रहृष्टाः प्रकृतयो बल अध्यक्षा बलस्य च ।श्रुत्वा यात्राम् समाज्ञप्ताम् राघवस्य निवर्तने॥
tāḥ prahṛṣṭāḥ prakṛtayo bala adhyakṣā balasya ca |śrutvā yātrām samājñaptām rāghavasya nivartane ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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