वाल्मीकि रामायण 2.86.13
अस्मिन् प्रव्राजिते राजा न चिरम् वर्तयिष्यति ।विधवा मेदिनी नूनम् क्षिप्रम् एव भविष्यति॥
asmin pravrājite rājā na ciram vartayiṣyati |vidhavā medinī nūnam kṣipram eva bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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