वाल्मीकि रामायण 2.89.16
नारीणामभिपूर्णास्तु काश्चित् काश्चिच्च वाजिनाम् ।काश्चिदत्र वहन्ति स्म यानयुग्यं महाधनम्॥
nārīṇāmabhipūrṇāstu kāścit kāścicca vājinām |kāścidatra vahanti sma yānayugyaṃ mahādhanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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