वाल्मीकि रामायण 2.89.4
इति संवदतोरेवमन्योन्यं नरसिंहयो: ।आगम्य प्राञ्जलि: काले गुहो भरतमब्रवीत्॥
iti saṃvadatorevamanyonyaṃ narasiṃhayo: |āgamya prāñjali: kāle guho bharatamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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