वाल्मीकि रामायण 2.9.19
कथैषा तव तु स्नेहान्मनसा धार्यते मया ।रामाभिषेकसंभारान्निगृह्य विनिवर्तय॥
kathaiṣā tava tu snehānmanasā dhāryate mayā |rāmābhiṣekasaṃbhārānnigṛhya vinivartaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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