वाल्मीकि रामायण 2.9.1
एवमुक्ता तु कैकेयी कोपेन ज्वलितानना ।दीर्घमुष्टम् विनिःश्वस्य मन्थरामिदम् अब्रवीत्॥
evamuktā tu kaikeyī kopena jvalitānanā |dīrghamuṣṭam viniḥśvasya mantharāmidam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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