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वाल्मीकि रामायण 2.9.39
त्वमेव तु ममार्थेषु नित्ययुक्ता हितैषिणी॥
tvameva tu mamārtheṣu nityayuktā hitaiṣiṇī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंत्वमेव तु ममार्थेषु नित्ययुक्ता हितैषिणी॥
tvameva tu mamārtheṣu nityayuktā hitaiṣiṇī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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