वाल्मीकि रामायण 2.90.2
पद्भ्यामेव हि धर्मज्ञो न्यस्तशस्त्रपरिच्छद: ।वसानो वाससी क्षौमे पुरोधाय पुरोधसम्॥
padbhyāmeva hi dharmajño nyastaśastraparicchada: |vasāno vāsasī kṣaume purodhāya purodhasam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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