वाल्मीकि रामायण 2.91.49
तत: सरलतालाश्च तिलका नक्तमालका: ।प्रहृष्टास्तत्र सम्पेतु: कुब्जा भूत्वाथ वामना:॥
tata: saralatālāśca tilakā naktamālakā: |prahṛṣṭāstatra sampetu: kubjā bhūtvātha vāmanā: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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