वाल्मीकि रामायण 2.91.65
नाशुक्लवासास्तत्रासीत् क्षुधितो मलिनो ऽपि वा ।रजसा ध्वस्तकेशो वा नर: कश्चिददृश्यत॥
nāśuklavāsāstatrāsīt kṣudhito malino 'pi vā |rajasā dhvastakeśo vā nara: kaścidadṛśyata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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