वाल्मीकि रामायण 2.92.26
ममैतां मातरं विद्धि नृशंसां पापनिश्चयाम् ।यतो मूलं हि पश्यामि व्यसनं महदात्मन:॥
mamaitāṃ mātaraṃ viddhi nṛśaṃsāṃ pāpaniścayām |yato mūlaṃ hi paśyāmi vyasanaṃ mahadātmana: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें