वाल्मीकि रामायण 2.92.28
भरद्वाजो महर्षिस्तं ब्रुवन्तं भरतं तथा ।प्रत्युवाच महाबुद्धिरिदं वचनमर्थवत्॥
bharadvājo maharṣistaṃ bruvantaṃ bharataṃ tathā |pratyuvāca mahābuddhiridaṃ vacanamarthavat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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