वाल्मीकि रामायण 2.92.9
इति पृष्टस्तु भरतं भ्रातृदर्शनलालसम् ।प्रत्युवाच महातेजा भरद्वाजो महातपा:॥
iti pṛṣṭastu bharataṃ bhrātṛdarśanalālasam |pratyuvāca mahātejā bharadvājo mahātapā: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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