वाल्मीकि रामायण 2.94.15
यदीह शरदो ऽनेकास्त्वया सार्द्धमनिन्दिते ।लक्ष्मणेन च वत्स्यामि न मां शोक: प्रधक्ष्यति॥
yadīha śarado 'nekāstvayā sārddhamanindite |lakṣmaṇena ca vatsyāmi na māṃ śoka: pradhakṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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