वाल्मीकि रामायण 2.94.26
वस्वौकसारां नलिनीमत्येतीवोत्तरान् कुरून् ।पर्वतश्चित्रकूटो ऽसौ बहुमूलफलोदक:॥
vasvaukasārāṃ nalinīmatyetīvottarān kurūn |parvataścitrakūṭo 'sau bahumūlaphalodaka: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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