वाल्मीकि रामायण 2.97.12
अम्बां च कैकयीं रुष्य परुषं चाप्रियं वदन्।प्रसाद्य पितरं श्रीमान् राज्यं मे दातुमागत:॥
ambāṃ ca kaikayīṃ ruṣya paruṣaṃ cāpriyaṃ vadan |prasādya pitaraṃ śrīmān rājyaṃ me dātumāgata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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