वाल्मीकि रामायण 2.97.17
यदि राज्यस्य हेतोस्त्वमिमां वाचं प्रभाषसे।वक्ष्यामि भरतं दृष्ट्वा राज्यमस्मै प्रदीयताम्॥
yadi rājyasya hetostvamimāṃ vācaṃ prabhāṣase |vakṣyāmi bharataṃ dṛṣṭvā rājyamasmai pradīyatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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